जब हज़रत मरयम ने लम्बा क़याम किया, इतनी देर तक नमाज़ में खड़ी रहीं कि आपके क़दमे मुबारक पर सूजन आ गई और पाँव फट कर

सूरए आले इमरान- पाँचवा रूकू अल्लाह के नाम से शुरु जो बहुत मेहरबान रहमत वाला, और जब फ़रिश्ते ने कहा ऐ मरयम अल्लाह ने तुझे चुन लिया (1) और ख़ूब सुथरा किया (2) और आज सारे जहान की औरतों से तुझे पसन्द किया (3)(42) ऐ मरयम अपने रब के हुज़ूर अदब से खड़ी हो (4) और उस के लिये सिजदा कर और रूकू वालों के साथ रूकू कर (43) ये गै़ब की ख़बरें हैं कि हम ख़ुफिया तौर पर तुम्हें बताते हैं (5) और तुम उनके पास न थे जब वो अपनी क़लमों से क़ुरआ (लाटरी) डालते थे कि मरयम किसकी परवरिश में रहे और तुम उनके पास न थे जब वो झगड़ रहे थे.

(6)(44) और याद करो जब फ़रिश्तों ने मरयम से कहा कि ऐ मरयम अल्लाह तुझे बशारत (ख़ुशख़बरी) देता है अपने पास से एक कलिमे की (7) जिसका नाम है मसीह ईसा मरयम का बेटा, रूदार (प्रतापी) होगा(8) दुनिया और आख़िरत में और क़ुर्ब (समीपता) वाला (9)(45) और लोगों से बात करेगा पालने में (10) और पक्की उम्र में (11) और ख़ासों में होगा (46) बोली ऐ मेरे रब मेरे बच्चा कहां से होगा मुझे तो किसी शख़्स ने हाथ न लगाया(12) फ़रमाया अल्लाह यूं ही पैदा करता है जो चाहे जब किसी काम का हुक्म फ़रमाए तो उससे यही कहता है कि हो जा वह फौरन हो जाता है(47) और सिखाएगा किताब और हिकमत (बोध) और तौरात और इंजील

(48) और रसूल होगा बनी इस्राईल की तरफ़ यह फ़रमाता हुआ कि मैं तुम्हारे पास एक निशानी लाया हुँ (13) तुम्हारे रब की तरफ़ से कि मैं तुम्हारे लिये मिट्टी से परिन्द की मूरत बनाता हुँ फिर उसमें फूंक मारता हुँ तो वह फौरन परिन्द हो जाती है अल्लाह के हुक्म से(14) और मैं शिफ़ा देता हुँ मादरज़ाद (पैदाइशी) अंधे और सफ़ेद दाग वाले को (15) और मैं मुर्दें जिलाता हुँ अल्लाह के हुक्म से (16) और तुम्हें बताता हुँ जो तुम खाते और जो अपने घरों में जमा कर रखते हो (17) बेशक उन बातों में तुम्हारे लिये बड़ी निशानी है अगर तुम ईमान रखते हो (49) और पुष्टि करता आया हुँ अपने से पहली किताब तौरात की और इसलिये कि हलाल करूं तुम्हारे लिये कुछ वो चीज़े जो तुमपर हराम थी

(18) और मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से निशानी लाया हुँ तो अल्लाह से डरो और मेरा हुक्म मानो (50) बेशक मेरा तुम्हारा सबका रब अल्लाह है तो उसी को पूजो (19) यह है सीधा रास्ता (51) फिर जब ईसा ने उनसे कुफ्र पाया (20) बोला कौन मेरे मददगार होते हैं अल्लाह की तरफ़ हवारियों (अनुयाइयों) ने कहा (21) हम ख़ुदा के दीन के मददगार हैं हम अल्लाह पर ईमान लाए और आप गवाह हो जाएं कि हम मुसलमान हैं(22) (52) ऐ रब हमारे हम उस पर ईमान लाए जो तूने उतारा और रसूल के ताबे (अधीन) हुए तू हमें हक़ पर गवाही देने वालों में लिख ले (53) और काफ़िरों ने मक्र (कपट) किया (23) और अल्लाह ने उनके हलाक की छुपवां तदबीर (युक्ति) फ़रमाई और अल्लाह सबसे बेहतर छुपी तदबीर वाला है (24) (54)

तफ़सीर: सूरए आले इमरान – पाँचवा रूकू

(1) कि औरत होने के बावुजूद बैतुल मक़दिस की ख़िदमत के लिये भेंट में क़ुबूल फ़रमाया और यह बात उनके सिवा किसी औरत को न मिली. इसी तरह उनके लिये जन्नती खाना भेजना, हज़रत ज़करिया को उनका पालक बनाना, यह हज़रत मरयम की महानता का प्रमाण है. (2) मर्द की पहुंच से और गुनाहों से और कुछ विद्वानों के अनुसार ज़नाना दोषों और मजबूरियों से.

(3) कि बग़ैर बाप के बेटा दिया और फ़रिश्तों का कलाम सुनाया. (4) जब फ़रिश्तों ने यह कहा, हज़रत मरयम ने इतना लम्बा क़याम किया यानी इतनी देर तक नमाज़ में खड़ी रहीं कि आपके क़दमे मुबारक पर सूजन आ गई और पाँव फट कर ख़ून जारी हो गया. (5) इस आयत से मालूम हुआ कि अल्लाह तआला ने अपने हबीब सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को ग़ैब के इल्म अता फ़रमाएं. (6) इसके बावुजूद आपका इन घटनाओं की सूचना देना ठोस प्रमाण है इसका कि आपको अज्ञात का ज्ञान यानी ग़ैब की जानकारी अता फ़रमाई गई. (7) यानी एक बेटे की. (8) बड़ी शान और मान और ऊंचे दर्जे वाला. (9) अल्लाह की बारगाह में.(10) बात करने की उम्र से पहले.

(11) आसमान से उतरने के बाद. इस आयत से साबित होता है कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान से ज़मीन की तरफ़ उतरेंगे जैसा कि हदीसों में आया है और दज्जाल को क़त्ल करेंगे. (12) और क़ायदा यह है कि बच्चा औरत और मर्द के मिलाप से होता है तो मुझे बच्चा किस तरह अता होगा. निकाह से या यूंही बिना मर्द के. (13) जो मेरे नबुव्वत के दावे की सच्चाई का प्रमाण है. (14) जब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने नबुव्वत का दावा किया और चमत्कार दिखाए तो लोगों ने दरख़ास्त की कि आप एक चिमगादड़ पैदा करें. आपने मिट्टी से चिमगादड़ की सूरत बनाई फिर उसमें फूंक मारी तो वह उड़ने लगी. चिमगादड़ की विशेषता यह है कि वह उड़ने वाले जानवरों में बहुत सम्पूर्ण और अजीबतर जानवर है.

और अल्लाह की क़ुदरत पर दलील बनने से सबसे बढ़कर, क्योंकि वह बिना परों के उड़ती है, और दांत रखती है, और हंसती है, और उसकी मादा के छाती होती है, और बच्चा जनती है, जब कि उड़ने वाले जानवरों में ये बात नहीं है. (15) जिसका कोढ़ आम हो गया हो और डांक्टर उसका इलाज करने से आजिज़ या अयोग्य हों. चूंकि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के ज़माने में तिब यानी चिकित्सा शास्त्र चरम सीमा पर था और इसके जानने वाले इलाज में चमत्कार रखते थे. इस लिये उनको उसी क़िस्म के चमत्कार दिखाए गए ताकि मालूम हो कि तिब के तरीक़े से जिसका इलाज सम्भव नहीं है उसको तंदुरूस्त कर देना यक़ीनन चमत्कार और नबी के सच्चे होने की दलील है.

वहब का क़ौल है कि अकसर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के पास एक दिन में पचास-पचास हज़ार बीमारों का जमघट हो जाता था. उनमें जो चल सकता था वह ख़िदमत में हाज़िर होता था और जिसे चलने की ताक़त न होती थी उसके पास ख़ुद हज़रत तशरीफ़ ले जाते और दुआ फ़रमाकर उसको तन्दुरूस्त करते और अपनी रिसालत पर ईमान लाने की शर्त कर लेते.

(16) हज़रत इब्ने अब्बास ने फ़रमाया कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने चार व्यक्तियों को ज़िन्दा किया, एक आज़िर जिसको आपके साथ महब्बत थी. जब उसकी हालत नाज़ुक हुई तो उसकी बहन ने आपको सूचना दी मगर वह आपसे तीन दिन की दूरी पर था. जब आप तीन रोज़ में वहाँ पहुंचे तो मालूम हुआ कि उसके इन्तिक़ाल को तीन दिन हो चुके हैं. आपने उसकी बहन से फ़रमाया हमें उसकी क़ब्र पर ले चल. वह ले गई. आपने अल्लाह तआला से दुआ फ़रमाई. अल्लाह की क़ुदरत से आज़िर ज़िन्दा होकर क़ब्र से बाहर आया और लम्बे समय तक ज़िन्दा रहा और उसके औलाद हुई.

एक बुढ़िया का लड़का, जिसका जनाज़ा हज़रत के सामने जा रहा था, आपने उसके लिये दुआ फ़रमाई, वह ज़िन्दा होकर जनाज़ा ले जाने वालों के कन्धों से उतर पड़ा. कपड़े पहने, घर आया, ज़िन्दा रहा, औलाद हुई. एक आशिर की लड़की शाम को मरी. अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ से उसे ज़िन्दा किया. एक साम बिन नूह जिन की वफ़ात को हज़ारों बरस गुज़र चुके थे. लोगों ने ख़्वाहिश की कि आप उनको ज़िन्दा करें. आप उनके बताए से क़ब्र पर पहुंचे और अल्लाह तआला से दुआ की. साम ने सुना कोई कहने वाला कहता है

“अजिब रूहुल्लाह” यह सुनते ही वो डर के मारे उठ खड़े हुए और उन्हें गुमान हुआ कि कयामत क़ायम हो गई. इस हौल से उनका आधा सर सफ़ेद हो गया, फिर वह हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाए और उन्होंने हज़रत से दरख़ास्त की कि दोबारा उन्हें सकरात यानी जान निकलने की तकलीफ़ न हो, उसके बिना वापस किया जाए. चुनांचे उसी वक़्त उनका इन्तिक़ाल हो गया. और “बिइज़्निल्लाह” (अल्लाह के हुक्म से) फ़रमाने में ईसाईयों का रद है जो हज़रत मसीह के ख़ुदा होने के क़ायल या मानने वाले थे. (17) जब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने बीमारों को अच्छा किया और मुर्दों को ज़िन्दा किया तो कुछ लोगो ने कहा कि यह तो जादू है, कोई और चमत्कार दिखाइये.

तो आपने फ़रमाया कि जो तुम खाते हो और जो जमा कर रखते हो, मैं उसकी तुम्हें ख़बर देता हूँ. इसी से साबित हुआ कि ग़ैब के उलूम नबियों के चमत्कार हैं. और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के दस्ते मुबारक पर यह चमत्कार भी ज़ाहिर हुआ. आप आदमी को बता देते थे जो वह कल खा चुका और आज खाएगा और जो अगले वक़्त के लिये तैयार कर रखा है. आप के पास बच्चे बहुत से जमा हो जाते थे. आप उन्हें बताते थे कि तुम्हारे घर अमुक चीज़ तैयार हुई है, तुम्हारे घर वालों ने अमुक अमुक चीज़ खाई है, अमुक चीज़ तुम्हारे लिये उठा रखी है. बच्चे घर जाते,रोते, घर वालों से वह चीज़ मांगते, घर वाले वह चीज़ देते और उनसे कहते कि तुम्हें किसने बताया.

बच्चे कहते हज़रत ईसा ने. तो लोगों ने अपने बच्चों को आपके पास आने से रोका और कहा वो जादूगर हैं, उनके पास न बैठो. और एक मकान में सब बच्चों को जमा कर दिया. हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम बच्चों को तलाश करते तशरीफ़ लाए तो लोगों ने कहा, यहाँ नहीं हैं. आपने फ़रमाया फिर इस मकान में कौन है. उन्होंने कहा, सुअर हैं. फ़रमाया, ऐसा ही होगा. अब जो दर्वाज़ा खोलते हैं तो सब सुअर ही सुअर थे. मतलब यह कि ग़ैब की ख़बरें देना नबियों का चमत्कार है और नबियों के माध्यम से बिना कोई आदमी ग़ैब की बातों पर सूचित नहीं हो सकता. (18) जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की शरीअत में हराम थीं जैसे कि ऊंट का गोश्त, मछली, चिड़ियाँ.

(19) यह अपने बन्दे होने का इक़रार और अपने ख़ुदा होने का इन्कार है. इसमें ईसाइयों का रद है. (20) यानी मूसा अलैहिस्सलाम ने देखा कि यहूदी अपने कुफ़्र पर क़ायम हैं और आपके क़त्ल का इरादा रखते हैं और इतनी खुली निशानियों और चमत्कारों से प्रभावित नहीं होते और इसका कारण यह था कि उन्होंने पहचान लिया था कि आप ही वह मसीह हैं जिनकी बशारत तौरात में दी गई है और आप उनके दीन को स्थगित करेंगे तो जब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने दावत का इज़हार फ़रमाया तो यह उनको बड़ा नागवार गुज़रा और वो आपको तकलीफ़ पहुंचाने और मार डालने पर तुल गए और आपके साथ उन्होंने कुफ़्र किया.

(21) हवारी वो महब्ब्त और वफ़ादारी वाले लोग हैं जो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के दीन के मददगार थे और आप पर पहले ईमान लाए. ये बारह लोग थे. (22) इस आयत से ईमान और इस्लाम के एक होने की दलील दी जाती है. और यह भी मालूम होता है कि पहले नबियों का दीन इस्लाम था न कि यहूदियत या ईसाइयत. (23) यानी बनी इस्त्राईल के काफ़िरों ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के साथ कपट किया कि धोखे के साथ आपके क़त्ल का इन्तिज़ाम किया और अपने एक आदमी को इस काम पर लगा दिया.

(24) अल्लाह तआला ने उनके कपट का यह बदला दिया कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को आसमान पर उठा लिया और उस आदमी को हज़रत की शक्ल दे दी जो उनके क़त्ल के लिये तैयार हुआ था. चुनांचे यहूदियों ने उसको इसी शुबह पर क़त्ल कर दिया. “मक्र” शब्द अरब में “सत्र” यानी छुपाने के मानी में है, इसीलिये छुपवाँ तदबीर को भी “मक्र” कहते हैं. और वह तदबीर अगर अच्छे मक़सद के लिये हो तो अच्छी और किसी बुरे काम के लिये हो तो नापसन्दीदा होती है. मगर उर्दू ज़बान में यह शब्द धोखे के मानी में इस्तेमाल होता है.

इसलिये अल्लाह के बारे में हरगिज़ न कहा जाएगा और अब चूंकि अरबी में भी यह शब्द बुरे मतलब में इस्तेमाल होने लगा है इसलिये अरबी में भी अल्लाह की शान में इसका इस्तेमाल जायज़ नहीं. आयत में जहाँ कहीं आया वह छुपवाँ तदबीर के मानी में है. (dewbandi ulma ne ALLAH k liye makar likha he Jo galat he)